  किताबें जिन्हें बच्चे पढ़ना चाहते हैं

पुस्तक मेले के दौरान एक कार्यक्रम में बहुत से बच्चों से बातचीत हुई। उस कार्यक्रम में यह जानने की कोशिश की जा रही थी कि बच्चों को पुस्तकालयों से कैसे जोड़ा जाए?

सबको लग रहा था कि वे बच्चों से वही बातें सुनेंगे, जो अरसे से सुनते आ रहे हैं। बच्चे कहेंगे कि उनकी दुनिया में तीन स्क्रीन्स यानी टीवी, कंप्यूटर व मोबाइल के अलावा कुछ और नहीं है। उन्हें होमवर्क इतना मिलता है कि कुछ और पढ़ने के लिए समय ही नहीं मिलता। इसीलिए जब भी समय मिलता है, तो वे नेट सर्फ करते हैं, या टीवी देखते हैं या फिर फेसबुक पर होते हैं।

मगर बच्चों ने कहा कि वे किताबें पढ़ना चाहते हैं। ऐसी किताबें, जो मजेदार हों और उन्हें किसी अन्य दुनिया में ले जाएं। उनमें एडवेंचर हो, ऐसे करतब हों, जिनके बारे में सोच नहीं सकते। लेकिन कौन-सी किताबें आई हैं और उनमें कौन-सी अच्छी हैं, इसका पता नहीं चलता, क्योंकि घर के आसपास कोई पुस्तकालय नहीं है। एक बच्चे ने कहा कि किताबों के बारे में गूगल से पता किया जा सकता है। ये बच्चे किसी कस्बे या गांव के नहीं थे। ये दिल्ली के बच्चे थे। बहुत से पब्लिक स्कूलों में पढ़ते थे, तो कुछ सरकारी स्कूलों के छात्र भी थे।

सुनकर लगा कि सचमुच हम इन बच्चों को कभी नहीं जान पाते, जानने का दावा चाहे जितना भी करें। हममें से अधिकांश ने तो यही मान लिया है कि बच्चों को गिजमोज, टीवी, फेसबुक, मोबाइलके अलावा कुछ और नहीं चाहिए। वे किताबें भी पढ़ना चाहते हैं, पिछले कई साल में यह बात पहली बार सुनी थी। 


आश्चर्य भी हो रहा था। अपने आसपास की बहसें भी याद आ रही थीं, जिनमें लोगों ने मान लिया था कि किताबें तो बस गईं। दिन लद गए। जब अपने देश में पूरी तरह से पेपरलेस सोसाइटी हो जाएगी, तब किताबों की जरूरत किसे रहेगी? न पुस्तकालय रहेंगे, और न किताबें छपेंगी। जो कुछ होगा, वह ऑनलाइन होगा। इधर आप लिखेंगे, उधर लोग पढ़ेंगे। किताब छपने, बिकने, पाठक तक पहुंचाने की जरूरत ही नहीं रहेगी। लेकिन सामने बैठे बच्चे तो चाहते थे कि किताबें ही उन तक पहुंचें। जल्दी से जल्दी पहुंचें। पता चले कि कब कौन-सी किताब आई है, ताकि वे अपनी मनपसंद किताब चुन सकें। 


ज्यादातर बच्चों ने कहा कि वे अपना होमवर्क पूरा करने और पढ़ाई करने के बाद भी कोई अच्छी किताब पढ़ना चाहेंगे। यह अच्छी किताब कौन-सी होगी? किसी के लिए जादू की, किसी के लिए पेड़-पौधों की, किसी के लिए नदी और उसमें पाए जाने वाले जीवों की, तो किसी के लिए जासूसी या अंतरिक्ष यात्रओं की। जितने बच्चे, उतनी ही उनकी अलग-अलग पसंद। लेकिन सबको किताब वह चाहिए, जो उनमें कुतूहल जगा सके। जिज्ञासा पैदा कर सके। जो कब, क्यों, कहां, किसलिए के सवाल खड़े करे और उनके जवाब भी दे सके। हमें बच्चों की इसी पसंद को पहचानना होगा।

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