उस बाग़ के फूल मुरझा जाते हैं ,जहाँ के माली बेगाने हो जाते हैं।


मित्रों , आज तो बहुत ही थक गया पर एक प्रसन्नता भी है कि एक और सत्र का समापन सफलतापूर्वक हो गया। अगले वर्ष 31 मार्च को भी ऐसी ही प्रसन्नता होगी ऐसी आशा है। फिर साल-दर-साल ऐसे ही गुजरता जाएगा। कल का दिन भी प्रसन्नता का होगा आखिर नया सत्र जो आ रहा है नए बच्चे, नई चुनौतियाँ और नए अनुभव। कल का दिन इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन शिक्षा का अधिकार अधिनियम भी लागू हुआ था और हाँ साथ ही..........उफ्फ पर सब कुछ इतना सुखद नहीं है। 1 अप्रैल के साथ जुड़ा हुआ है वो काला इतिहास जो हमारे अग्रजों के 12 वर्ष पूर्व दिखाए गए आलस्य का परिणाम है।


मित्रों , 9 से 3 की ड्यूटी करके और 70 किमी बाइक चलाकर अब हिम्मत नहीं है यूँ चिंतक बनने की परन्तु बनना पड़ रहा है। विद्यालय कार्य समाप्त हो चुका है अब अवकाश का समय है। ये समय होना चाहिए परिवार के साथ बैठने का , घर पर ढीले कपड़े पहनकर आराम से सोने का , टीवी देखने का या फिर कहीं घूमने का। यूँ आँखें गड़ाकर किसी लेख को लिखने या पढ़ने का तो कतई नहीं होना चाहिए। आखिर हम युवा हैं मौज-मस्ती का भी कोई स्थान होना चाहिए जीवन में। पर इसके बाद भी न जाने क्यूँ कलम उठी एक गम्भीर मुद्दे की ओर क्योंकि ऐसा लगा कि यदि आज कलम न उठी तो सुनहरे कल का सिर क़लम हो जाएगा।



यदि आज युवावस्था में हमने मिलकर पुरानी पेंशन के लिए न सोचा, न ही कोई संघर्ष किया तो सेवानिवृत्ति के बाद घर पर पहनने के लिए ढीले कपड़े भी न होंगे और जब हर दिन अवकाश का ही दिन होगा तब हम कहीं घूमने जाने के तो क्या घर में खाने के भी मोहताज होंगे । 



मित्रों जैसा कि और लोगों को जलन है कि हमारा वेतन बहुत है। चलिए मान लेते हैं बहुत है। आज 38000 है कल 50000 होगा और सेवानिवृत्ति के समय 2 लाख भी होगा।  ऐशोआराम का जीवन जीने के लिए बहुत है, परन्तु सेवानिवृत्ति के अगले दिन हमारी आय क्या होगी? निःसन्देह शून्य।



क्योंकि जब 2004 में पेंशन बन्द हुई तब हमारे नेताओं ने पुरजोर संघर्ष नहीं किया। माना कि उन्होंने नारे लगाए , सभा कीं , दो-चार ज्ञापन भी दिए , परन्तु अपर्याप्त। जैसे परीक्षा में 33 नम्बर वाला उत्तीर्ण होता है परन्तु 32 वाला अनुत्तीर्ण होता है।  वैसा ही हाल शिक्षक संघों का था। उसने 32 नम्बर वाली ही मेहनत की और छाती पीटकर बहाने बनाता है कि इसको नहीं मिल रही , उसको भी नहीं मिल रही तो आपको कैसे मिले। फिर भी हम संघर्ष कर रहे हैं आदि-आदि। परन्तु सच्चाई तो यही है कि 32 नम्बर वाली मेहनत कोई मायने नहीं रखती।



दुर्भाग्य तो ये है कि अब लोगों ने लाभ भी उठाना आरम्भ कर दिया इस पुरानी पेंशन के मुद्दे का। हम युवा साथियों को बरगलाने के लिए और अपने धरने में संख्याबल बढ़ाने के लिए कभी 10 नम्बर तो कभी 15 नम्बर , कभी 20 नम्बर तो कभी 1 नम्बर पर पुरानी पेंशन की माँग रखना आरम्भ कर दिया,  पर हम युवाओं का मात्र प्रयोग किया उपयोग न किया। हमारी संख्या का प्रयोग किया गया परन्तु हमारे जोश का नहीं। हम संघर्ष को तैयार थे पर वो नेतृत्व करने को भी नहीं। हम बस उनके वर्षों के कमाए गए नाम के सहारे अपनी बात रखना चाहते थे परन्तु ये भी गंवारा न था क्योंकि उनका भविष्य हमारी भाँति खतरे में न था। 



परन्तु मित्रों अब बहुत हो चुका। अब हम किसी नाम के पीछे नहीं भाग सकते। अब हमें अपनी लड़ाई अपने ही बलबूते लड़नी होगी। जैसा कि मैंने प्रारम्भ में कहा था कि-

उस बाग़ के फूल मुरझा जाते हैं ,जहाँ के माली बेगाने हो जाते हैं ।


हमारा माली बेगाना हो गया है। वो हमारे लाभ उठाना चाहता है परन्तु हमें पोषित नहीं करना चाहता, पर मित्रों माली बेगाने हुआ तो क्या हुआ, हम अपने अधिकारों पर आँच नहीं आने देंगे। क्योंकि-

उस बाग़ के माली भी बदल जाते हैं ,जहाँ के फूल बगावत पर उतर आते हैं


तो मित्रों अब इस संगठन , उस संगठन के आश्वासनों पर हमें निर्भर नहीं रहना है। हमें सोचना होगा कि हम कैसे फिर से पुरानी पेंशन पाएँ। आज से हमारे कदम जब किसी संगठन के लिए चलें तो वो इसलिए नहीं कि उसने पुरानी पेंशन की भी माँग रखी है अपितु इसलिए कि उसने पुरानी पेंशन की ही मांग रखी है। हमें सुनिश्चित करना होगा कि एकसूत्रीय माँग - पुरानी पेंशन ही रहे। अगर इस समय हमने संघर्ष न करके आराम किया तो आराम करने की आयु में एक-एक रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।

|| जय शिक्षक || 


लेखक : प्रांजल सक्सेना
प्राथमिक शिक्षक 
सदस्य, "प्राइमरी का मास्टर" एडमिन टीम 
जनपद - बरेली

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  1. ह्ह्ह्ह
    लेख उड़ाने वालो से भयभीत लग रहे आप

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  2. हमारी माग केवलएक होनी चाहियेहमेपुरानीपेशंनकेलिये लडनाहैपेशंन केविनानौकरीकाकोईलाभनहीहैहम2005वालो को एकसाथहोनाहै अपनीलडाईस्वय लडनी है

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  3. हमारी माग केवलएक होनी चाहियेहमेपुरानीपेशंनकेलिये लडनाहैपेशंन केविनानौकरीकाकोईलाभनहीहैहम2005वालो को एकसाथहोनाहै अपनीलडाईस्वय लडनी है

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  4. All Govt Employees under NEW PENSION SCHEME
    Please Join & Share "NPS Govt Employee's Forum - Centre & All State Govts" group
    for all information on New Pension Scheme and to fight against NPS.
    All Unions of all states please join this group & fight together against NPS.
    Join this group and add your friends for more information on NPS.
    Kindly Join hands against NPS and share this group with your friends.
    Unions against NPS are formed in Punjab, UP, Tamil Nadu, Karnataka, Himachal Pradesh
    and now it’s your turn to Join Hands to fight against NPS.
    Link to Join Group
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