व्यवस्था के  नाम एक परिषदीय शिक्षक का खुला पत्र
व्यवस्था के नाम एक परिषदीय शिक्षक का खुला पत्र

आज पहली बार एहसास हुआ कि अपनी बात अपने ही सिस्टम अपनी ही व्यवस्था से कहने के लिए किसी शिक्षक को अपना नाम छुपाने के लिए विवश होना पड़ रह...

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बाल श्रम का कलंक
बाल श्रम का कलंक

संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी, शत्रु संपत्ति, फैक्ट्री संशोधन, बाल श्रम, व्हिसल ब्लोअर समे...

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भावी पीढ़ी के साथ खिलवाड़
भावी पीढ़ी के साथ खिलवाड़

भारत की नई पीढ़ी के साथ हो रहा जालसाजी का तांडव अपने आप में एक जर्जर व्यवस्था को पूरी तरह बदलने के स्पष्ट संकेत देता है। कुछ ही दिन...

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भूमंडलीकृत दुनिया में बच्चे
भूमंडलीकृत दुनिया में बच्चे

य ह वैश्वीकरण का दौर है, जहां पूंजी को दुनियाभर में विचरण करने की छूट है, लेकिन इससे बनाई गई संपदा पर चुनिंदा लोगों का ही कब्जा ह...

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बेहतर बनने की राह पर बढ़ते शिक्षक
बेहतर बनने की राह पर बढ़ते शिक्षक

शिक्षा से जुड़े मसलों पर शिक्षकों का विचार-विमर्श करना देश की शैक्षणिक तस्वीर बदल सकता है । पिथौरागढ़ में एक शाम हमने अब्बास कियारोस्ता...

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बचपन छीनती आधुनिक शिक्षा
बचपन छीनती आधुनिक शिक्षा

आजकल ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर परेशान हैं, बच्चे के जन्म से ही उसके डॉक्टर या इंजीनियर बनाने की चाह माता पिता को ...

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ताकि हर बच्चे को मिले अच्छी शिक्षा
ताकि हर बच्चे को मिले अच्छी शिक्षा

केंद्र और राज्यों को पूरी तरह जिम्मेदार बनाए बिना क्या देश के सभी बच्चों तक अच्छी गुणवत्ता की स्कूली शिक्षा पहुंचाई जा सकती है ? सं...

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बच्चों की आंखों में झांकिए!
बच्चों की आंखों में झांकिए!

जुलाई की खास पहचान कम से कम अपने देश में दो रूपों में देखने को मिलती है- एक तो मानसून की मेहरबानी से हर तरफ हरियाली और खेतों में खरीफ की...

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शिक्षकों की लापरवाही, तनाव में छात्र
शिक्षकों की लापरवाही, तनाव में छात्र

छात्र और शिक्षक अनुपात जरूरी ढुलमुल रवैये से छात्रों में कॉर्टीसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। छात्रों में तनाव सिर्फ पढ़ाई या अच्छ...

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कुपढ़ से अनपढ़ भले
कुपढ़ से अनपढ़ भले

स्कूल का मतलब होता है पढ़ाई और जो स्कूल न जाय वह अनपढ़ कहा जाता है। इसलिए स्कूल जाना जरूरी है। आज कई तरह के स्कूल खुल गए हैं और वे किस्म...

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शिक्षा को चाहिए नया विमर्श
शिक्षा को चाहिए नया विमर्श

ढेर सारी सिफारिशों वाली सुब्रहण्यम कमेटी की रिपोर्ट यह बताने में असफल रही है कि शिक्षा के लिए जरूरी वित्तीय साधन कैसे जुटाए जाएँगे ? ...

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हुजूर-ए-आला हमारी भी सुनो.........
हुजूर-ए-आला हमारी भी सुनो.........

  सुदूर जीवन इतना कष्टमय होगा- परिकल्पना करना अतुलनीय एवं कष्टकारी है। साधन विहीन मानव जीवन का पहलू है- संघर्ष। इस संघर्ष की गाथा मे...

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