रटकर याद रखने का ज्ञान और मनोविज्ञान
रटकर याद रखने का ज्ञान और मनोविज्ञान

रटने को लेकर धारणाएं चाहे जो हों, अब इसके सकारात्मक पहलू को भी देखा जाने लगा है। आप रटकर क्या याद कर सकते हैं- गणित के फॉमरूले, पहाड...

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नहीं दिखतीं बच्चों की अठखेलियां
नहीं दिखतीं बच्चों की अठखेलियां

आज है बालश्रम दिवस ज महंगाई से त्रस्त जीवन में बचपन से ही जिंदगी की जद्दोजहद में उलझ जाना पड़ता है। बालकों की निश्छल, अल्हड़, उन्मुक्त ह...

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स्कूलों की जिम्मेदारी
स्कूलों की जिम्मेदारी

  स्कूलों का दायित्व है कि माता-पिता को याद दिलाएं कि बच्चे की भावनाओं, संकल्पनाओं तथा जिज्ञासा को पनपने देना ही उसके जीवन में उनका सब...

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 स्मार्टफोन के शिक्षक बन जाने के बाद
स्मार्टफोन के शिक्षक बन जाने के बाद

मोबाइल फोन से सीखा गया ज्ञान अगर रोजगार न दिला सका, तो वह निरर्थक रह जाएगा। डिजिटल इंडिया की मुहिम अब शिक्षा के क्षेत्र में पहुंच रही...

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 ..ताकि बोझ न बने शिक्षा
..ताकि बोझ न बने शिक्षा

..ताकि बोझ न बने शिक्षा हमें खुद में झांकने की जरूरत है। हमें दूसरा क्यों परिभाषित करे? क्यों हम दूसरे के आईने में देखे...

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हालात ए मिड डे मील
हालात ए मिड डे मील

मित्रों आपको ज्ञात होगा कि एक समय था जब मिड डे मील की बेसिक शिक्षा के स्कूलों में आवश्यकता महसूस की गई थी, क्योंकि तब यह महसूस किया गया ...

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बहुत उलझन भरा है शिक्षा और शिक्षकों का काम
बहुत उलझन भरा है शिक्षा और शिक्षकों का काम

शिक्षक और छात्रों की सच्चाई परखकर ही हम शिक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार ला सकेंगे । इससे सभी सहमत होंगे कि शिक्षा को बेहतर बनाने के ल...

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लोककल्याणकारी सरकारों एवं जनसेवकों का बदलता स्वरूप और खोखलापन
लोककल्याणकारी सरकारों एवं जनसेवकों का बदलता स्वरूप और खोखलापन

आजादी के बाद जब भारत की संसद का गठन हुआ तो उसमें तमाम ऐसे स्वतंत्रता सेनानी, सांसद बन गए जिन्होने आजीवन आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए घर- बा...

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गुणवत्ता के लिए दोषी कौन अध्यापक या व्यवस्था?
गुणवत्ता के लिए दोषी कौन अध्यापक या व्यवस्था?

हम सभी दोस्त महीने में एक बार ढाबे पर खाना जरूर खाते हैं। ढाबा फिक्स है और कारीगर भी। उस ढाबे के खाना बनाने बाले कारीगर के हाँथ का खाना बह...

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शिक्षा के लिए जरूरी बहस : बिना परीक्षा के अगली कक्षा में भेजने की नीति पर पुनर्विचार जरूरी
शिक्षा के लिए जरूरी बहस : बिना परीक्षा के अगली कक्षा में भेजने की नीति पर पुनर्विचार जरूरी

केंद्र सरकार ने पिछले दिनों देश भर के शिक्षा मंत्रियों के साथ आठवीं कक्षा तक बिना परीक्षा के अगली कक्षा में भेजने की नीति के सभी पक्षों पर...

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भले ही व्यवस्था ने गैरशैक्षणिक कार्यों के जरिये  शिक्षकों का सम्मान और  हौसला तोड़ा हो लेकिन ...
भले ही व्यवस्था ने गैरशैक्षणिक कार्यों के जरिये शिक्षकों का सम्मान और हौसला तोड़ा हो लेकिन ...

आप सब ये तो जानते ही हैं कि 14 मार्च से हमारे परिषदीय बच्चों के एग्जाम शुरू हो रहे हैं। हमें इस घड़ी में उनका साथ देते हुए उनको हौसला देना...

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विद्यालय  ऐसा हो कि जिसमे प्रवेश के लिए बच्चा अपने घर में जिद करे
विद्यालय ऐसा हो कि जिसमे प्रवेश के लिए बच्चा अपने घर में जिद करे

निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून लागू हुए 6 वर्ष से अधिक हो गए हैं पर गांधी जी द्वारा 1924 में उठाये प्रश्न आज भी प्रासंगिक हैं। ...

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