गुलाम
गुलाम

जंज़ीरें, जंज़ीरें ही हैं, चाहे वे लोहे की हों या सोने की, वे समान रूप से तुम्हें गुलाम बनाती हैं। स्वामी रामतीर्थ

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श्रद्धा
श्रद्धा

चाहे गुरु पर हो या ईश्वर पर , श्रद्धा अवश्य रखनी चाहिए। क्योंकि बिना श्रद्धा के सब बातें व्यर्थ होती हैं। समर्थ रामदास

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योग्य वकील
योग्य वकील

एक अयोग्य वकील किसी मुकदमे को महीनों और बरसों तक लटका सकता है । योग्य वकील इससे भी ज्यादा लटका सकता है एवले जे. यंगर

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बेकार
बेकार

केवल वही व्यक्ति बेकार नहीं , जो बैठा रहता है । बल्कि वह भी बेकार है , जिसकी योग्यता का पूर्ण लाभ नहीं लिया जाता । सुकरात

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अवसर
अवसर

अवसर का फायदा उठाने से ज्यादातर लोग चूक जाते हैं , क्योंकि ज्यादातर अवसर काम की शक्ल में आतें हैं । थॉमस अल्वा एडिसन

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अच्छा दिमाग
अच्छा दिमाग

सबसे अच्छे दिमाग वाले लोग सरकार में नहीं हैं । वे जहाँ भी होंगे , व्यापार की दुनिया वाले उन्हें खरीद लेंगे । रोनाल्ड रीगन

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माँ का प्यार
माँ का प्यार

कुछ माएं बच्चों को चूमती हैं , कुछ उन्हें डांटती हैं । प्यार तो ऐसा ही होता है । पर्ल एस. बक

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जनता की उपेक्षा
जनता की उपेक्षा

सर्वसाधारण जनता की उपेक्षा एक बड़ा राष्ट्रीय अपराध है। स्वामी विवेकानंद

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मेहनत से दरिद्रता दूर
मेहनत से दरिद्रता दूर

मेहनत करने से दरिद्रता नहीं रहती , धर्म करने से पाप नहीं रहता , मौन रहने से कलह नहीं होता और जागते रहने से भय नहीं हो...

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आत्मप्रियता में राजा का हित नहीं
आत्मप्रियता में राजा का हित नहीं

प्रजा के सुख में ही राजा का सुख और प्रजाओं के हित में ही राजा को अपना हित समझना चाहिए। आत्मप्रियता में राजा का हित ...

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कष्ट - प्रेरक शक्ति
कष्ट - प्रेरक शक्ति

कष्ट ही तो वह प्रेरक शक्ति है जो मनुष्य को कसौटी पर परखती है और आगे बढ़ाती है। सावरकर

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हताश न होना भइया
हताश न होना भइया

हताश न होना सफलता का मूल है और यही परम सुख है। उत्साह मनुष्य को कर्मो में प्रेरित करता है और उत्साह ही कर्म को सफल बनता है। वाल्मीकि

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