नवाचार के प्रमुख पद
नवाचार के प्रमुखतः निम्नलिखित पद निर्धारित किए जा सकते है। 

1. खोज या शोध
2. परीक्षण
3. मूल्यांकन
4. विकास
5. विस्तार या फैलाव
6. उपयोग हेतु स्वीकार करना


शैक्षिक नवाचार के आधार
नवाचार की परिस्थितियॉं हर क्षेत्र में अलग-अलग अर्थ बताती हैं। इनके प्रयोग के तरीके भी अलग-अलग रूप में प्रयोग में लाए जाते है। जैसा कि प्रो0 उदय पारिख और श्री टी0पी0 राव नवाचार को बड़ी सरलता से परिभाषित करते हैं-
“किसी उपयोगी कार्य के लिए किसी व्यक्ति या निकाय के द्वारा किया गया विचार अथवा अभ्यास नवाचार कहलाता है।” सभी कार्य ऐसे है, जो पहले कहीं न कहीं किसी न किसी के द्वारा पूर्व में किए जा चुके है। पर आपने पूर्व में किए कार्य को यदि अपनी नयी रचनात्मक शैली प्रदान की है, तो यही प्रयास नवाचार बन जाता है।



नवाचार को निम्नलिखित दो कोटियों में रखा जा सकता है।

(अ) सामाजिक अन्तः क्रियात्मक नवाचारः- इसके अंतर्गत किसी संस्था या उसके मानवीय समूहों से वार्ता करके जब कुछ नया करते है, तो वह सामाजिक अन्तःक्रियात्मक नवाचार कहलाता है। इसमें कार्य के गुण दोष दोनों देखे जाते है, विशेषताओं की जानकारी एवं उपयोगी विचार अपना लिए जाते हैं।

(ब) समस्या समाधान संबंधी नवाचारः- वर्तमान सामाजिक व्यवस्था में आ रही समस्याओं के निराकरण के लिए नये तरीके खोजकर उस समस्या का समाधान कर दिया जाए, तो यह समस्या समाधान संबंधी नवाचार कहलाता है। नवाचार शिक्षण पद्धतियों का संबंध इसी समस्या समाधान/ (अधिगम की समस्या समाधान) संबंधी नवाचार से है।


नवाचारी शिक्षण (Innovative Teaching) पर यह सीरीज क्रमश: जारी  है!

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