सब की सुनो
सब की सुनो

मीना की दुनिया-रेडियो प्रसारण एपिसोड-27 कहानी का शीर्षक- “सब की सुनो” कल मीना के स्कूल में बाल संसद की बैठक होने जा रही है, उस बैठ...

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किस से कहूँ?
किस से कहूँ?

मीना की दुनिया-रेडियो प्रसारण एपिसोड-24 आज की कहानी का शीर्षक- “किस से कहूँ?” मीना,चिंटू और सुमी स्कूल जा रहे हैं। मीना ये जानने क...

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मजेदार पढ़ाई ~ पढाई हो तो....मजेदार
मजेदार पढ़ाई ~ पढाई हो तो....मजेदार

मीना की दुनिया-रेडियो प्रसारण एपिसोड - 22 आज की कहानी का शीर्षक-  “मजेदार पढ़ाई ~  पढाई हो तो....मजेदार” आज मीना का स्कूल गर्मियों...

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मैं भी हूँ
मैं भी हूँ

मीना की दुनिया-रेडियो प्रसारण एपिसोड-20 आज की कहानी का शीर्षक- “मैं भी हूँ” मीना के स्कूल के स्पोर्ट्स टीचर क्लास में बताते हैं, ‘...

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छुपन-छुपाई
छुपन-छुपाई

मीना की दुनिया-रेडियो प्रसारण  एपिसोड-13 कहानी का शीर्षक- ‘छुपन-छुपाई’ मीना दीपू,सुनील,सुमी और रानो के साथ छुपन-छुपाई खेल रही है। ...

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कान आँख खोल के ~ काम की ज़िम्मेदारी
कान आँख खोल के ~ काम की ज़िम्मेदारी

मीना की दुनिया-रेडियो प्रसारण एपिसोड-12 कहानी का शीर्षक- ‘कान आँख खोल के ’ (काम की ज़िम्मेदारी) मीना आज पतंग उड़ा रही है। पतंग की डोर...

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अनजान आदमी ~ अनजान शख्स
अनजान आदमी ~ अनजान शख्स

मीना की दुनिया-रेडियो प्रसारण एपिसोड-11 आज की कहानी का शीर्षक-  ‘अनजान  शख्स ~ अनजान आदमी’ मीना की बहिन जी स्कूल में पूरी क्लास को ...

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जहां सरकारी प्राथमिक शिक्षा अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है वहीं सरकारी  शिक्षक अपने सम्मान की
जहां सरकारी प्राथमिक शिक्षा अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है वहीं सरकारी शिक्षक अपने सम्मान की

प्राइमरी का मास्टर डॉट कॉम के फैलाव के साथ कई ऐसे साथी इस कड़ी में जुड़े जो विचारवान भी हैं और लगातार कई दुश्वारियों के बावजूद बेहतर ...

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शिक्षा के नाम पर राजनीति : यानी दोयम दर्जे की नियुक्तियों को पिछले दरवाजे से पदोन्नति?  सुशासन का आखिर यह कौन-सा मॉडल है?
शिक्षा के नाम पर राजनीति : यानी दोयम दर्जे की नियुक्तियों को पिछले दरवाजे से पदोन्नति? सुशासन का आखिर यह कौन-सा मॉडल है?

शिक्षा के नाम पर राजनीति मनीषा प्रियम उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षामित्रों की नियुक्ति रद्द करने संबंधी...

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भारत में शिक्षक के पेशे की प्रतिष्ठा जड़ से खत्म : कोई बच्चा मजबूरी में भी शिक्षक नहीं बनना चाहता, इसकी जवाबदेही लेने को सरकारें क्यों तैयार नहीं?
भारत में शिक्षक के पेशे की प्रतिष्ठा जड़ से खत्म : कोई बच्चा मजबूरी में भी शिक्षक नहीं बनना चाहता, इसकी जवाबदेही लेने को सरकारें क्यों तैयार नहीं?

मुझे अब तक यह याद नहीं पड़ता कि कभी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, दोनों ने एक ही दिन एक ही विषय पर सार्वजनिक भाषण दिया हो। लेकिन इस बार...

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यह कैसी व्यवस्था है, जहां एक बच्चे को शिक्षा के नाम पर खिचड़ी खिलाई जाती है, तो दूसरे को महंगे माध्यमों के सहारे दुनिया-जहान का ज्ञान परोसा जा रहा?
यह कैसी व्यवस्था है, जहां एक बच्चे को शिक्षा के नाम पर खिचड़ी खिलाई जाती है, तो दूसरे को महंगे माध्यमों के सहारे दुनिया-जहान का ज्ञान परोसा जा रहा?

परिदृश्य : शिक्षा का समान अवसर क्यों नहीं? सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारी सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत गरीब बच...

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आशा की अम्मा
आशा की अम्मा

एपिसोड-02 दिनांक-02/9/2015 आज की कहानी का शीर्षक : आशा की अम्मा आशा कक्षा सात की छात्रा थी। वह लगभग एक हफ्ते से स्कूल नहीं आ रही ...

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